Hydrocele badhane ka karan
Hydrocele

Hydrocele badhane ka karan

आमतौर पर hydrocele के badhane की समस्या communicating hydrocele में आती है। अब communicating hydrocele badhane ka karan जानने के लिए पहले हमें hydrocele के बारे में थोड़ा जानना होगा। तो hydrocele दरसल अंडकोष की थैली  में मौजूद एक संरचना, जिसे tunica veginalis कहते है, में तरल भर जाने की वजह से होता है।

अब ये जो tunica vaginalis है वो पेट से एक सुरंग द्वारा जुड़ी होती है। हमारे पैदा होने से पहले ही ये सुरंग बंद हो जाती है। अब अगर ये सुरंग किसी वजह से बंद नही हुई या फिर बंद होने के बाद फिर खुल गयी तो पेट की एक संरचना(peritonium) से तरल आके tunica veginalis में भर जाता है। इस इस्थिति को हम communicating hydrocele कहते हैं।

अगर आप hydrocele के बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो ये लेख पढ़िए–Hydrocele kya hai in Hindi

अब आप communicating hydrocele के बारे में इतनी बात समझ गए हैं तो आप को hydrocele badhne ka karan समझने में देर नहीं लगेगी।

जैसा कि आप ऊपर से पढ़ कर जान गए होंगे कि communicating hydrocele में peritonium और tunica veginalis को जोड़ने वाली सुरंग बन्द नहीं हो पाती या बन्द होने के बाद फिर खुल जाती है। तो इस के कारण peritonium में मौजूद तरल tunica vaginalis में आ जाता है , और सुरंग बन्द नहीं है तो वो लगातार आता रहता है। जिस के karan hydrocele badhne लगता है।

hydrocele ko kaise kam kare

Hydrocele ko kam karne के लिए डॉक्टर तीन प्रकार के तरीकों का इस्तेमाल कर सकतें है-

  1. Surgery
  2. Needle aspiration( सुई से तरल निकलना )
  3. Sclerotherapy

Surgery

Apollo hospital के एक लेख के अनुसार बच्चों में आमतौर पर hydrocele एक साल में अपने आप ही ठीक हो जाता है। अगर बच्चो में hydrocele 12 से 24 की उम्र तक ठीक नही हुआ तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। वहीं बड़ों में अगर hydrocele 6 माह के अंदर अपने आप ठीक नहीं हुआ तो सर्जरी करनी पड़ती है।

सर्जरी में डॉक्टर आपरेशन वाले हिस्से पे एनेस्थीसिया लगाकर उससे सुन्न कर देता है, फिर वह एक चीरा लगाकर hydrocele के तरल को निकाल देता है।

सर्जरी की प्रक्रिया से होने वाले दुष्प्रभावों में शामिल हैं-

  1. संक्रमण का खतरा।
  2. अंडकोष की थैली में चोट लगजाना, या किसी नस में क्षति हो जाना।

Needle aspiration

इस प्रक्रिया में डॉक्टर आप के अंडकोष की थैली में एक सुई डाल कर उसमें मौजूद तरल को निकलता है। कुछ मामलों में डॉक्टर उसमे दावा भी डाल सकता है ,ताकि थैली में दोबारा तरल न भर जाए।

आम तौर पर needle aspiration उन मरीजों में की जाती है जिनमे सर्जरी के दौरान complication होने की ज्यादा संभावना होती है।

इस उपचार के दुष्प्रभावों ( side effects) में शामिल है –

  1. अंडकोष की थैली में अस्थाई दर्द।
  2. संक्रमण का खतरा।

Sclerotherapy

Sclerotherepy भी इलाज का एक विकल्प है। sclerotherapy में सर्जरी से कम चीरा- फड़ी होती है, और इसका रिकवरी टाइम भी भी कम होता है। इसमें अलग- अलग तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है ,जैसे- doxycycline, tetracycline, antazoline, इत्यादि। और हर दावा की अलग-अलग सफलता दर होती है।

Needle Aspiration, Antazoline Sclerotherapy  और Surgery में से hydrocele के लिए को सा इलाज बेहतर है?

एक study में 92 hydrocele के मरीजों को पहले aspiration द्वारा इलाज किया गया। इसमे उन्होंने पाया कि खाली 14% मरीज़ ही ठीक हुए।

Source of data: British Journal of Urology

फिर 76 ऐसे मरीज़ जिनमें दोबारा hydrocele हो रहे थे उन में से कुछ का सर्जरी द्वारा ,तथा कुछ को antazoline sclerotherapy द्वारा इलाज किया गया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन का इलाज antazoline sclerotherapy द्वारा किया गया था उनमे से केवल 89% मरीज ही ठीक हुए, परंतु जिनका इलाज सर्जरी द्वारा किया गया था वो 100% मरीज़ ठीक हो गए।

Source of data: British Journal of Urology

hydrocele me kya khana chahiye

Hydrocele में किसी खास प्रकार के आहार को लेने की जरूरत नही होती, न ही किसी खास तरह के परहेज़ की। परंतु यह जरूरी है कि आप पोष्टिक आहार ही ले जिससे आप के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो। बड़ी उम्र के पुरुषों में hydrocele किसी संक्रमण की वजह से हो सकता है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहने से संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।

Hydrocele आमतौर पर 1 से 2 साल के बच्चों में ही देखा जाता है, और ज्यादातर मामले अपने आप ही ठीक हो जाते है। 6 से 12 माह की उम्र के बच्चों में सबसे पौष्टिक आहार माँ के दूध ही है। अगर आप के बच्चे की उम्र 6 माह से ज्यादा है तो माँ के दूध के साथ आप उसे कुछ ठोस आहार भी दे सकते है जैसे-

सब्जीयाँगाजर, कद्दू, आलू, मटर, शकरकंदी, तोरी, पेठा कद्दू, हरी गोभी और गोभी आदि सब्जियों का गाढ़ा गूदा (प्यूरी)
फल फलों की प्यूरी जैसे उबाला हुआ या भाप में पकाया हुआ सेब और नाशपती, आम या पपीता या मसले हुए फल जैसे पका हुआ मक्खनफल या केला, खरबूजा, तरबूज या चीकू।
सीरिअल्सउम्र के अनुसार बेबी सीरियल्स जैसे कि शिशु जो दूध पीता है उसमें आयरन फोर्टिफाइड बेबी राइस या सीरियल मिलाकर देना।
Source: www.babycenter.in

Reference

A comparison of aspiration, antazoline sclerotherapy and surgery in the treatment of hydrocele.

Hydrocele Treatment & Management

What is the role of sclerotherapy in the treatment of a hydrocele?

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