Diabetes ki sampurna guide
Diabetes

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डायबिटीज से भारत में कितने लोग प्रभावित होते हैं?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO)की डायबिटीज कंट्री प्रोफाइल 2016 के मुताबिक भारत में करीब 7.9% पुरुष और 7.5% महिलाएं डायबिटीज से पीड़ित हैं, और भारत मे होने वाली कुल मौतों में से 2% डायबिटीज की वजह से होती है।

एक रिसर्च के मुताबिक ये अनुमान है कि ग्रामीण आबादी में डायबिटीज का प्रसार (prevalence) शहरी आबादी का ¼ है। इंडियन कॉउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के शोध के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में ( जैसे- चड़ीगढ़ , झारखण्ड) महाराष्ट्र और तमिलनाडु के मुकाबले डायबिटीज के मरीजों की संख्या कम है।

द नेशनल सर्वे जो हिंदुस्तान के महानगरों में किया गया,वो भी इस बात की पुष्टि करता है। उसके मुताबिक- कोलकाता में 11.7%( पूर्वी भारत ), कश्मीर में 6.1%( उत्तर भारत), दिल्ली में 11.6%( उत्तर भारत), मुम्बई में 11.3%( पश्चिमी भारत) डायबिटीज के मरीज़ पाए गए। इसके मुकाबले दक्षिण भारत के महानगर जैसे चेन्नई में 13.5%, हैदराबद में 16.6%, और बैंगलोर में 12.4% पाए गए।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO)की डायबिटीज कंट्री प्रोफाइल 2016 के मुताबिक भारत की कुल 7.8 % आबादी डायबिटीज से ग्रस्त है , संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

वैसे तो मोटापा डायबिटीज का बहुत बड़ा जोखिम करक है पर यूरोप और अमेरिका के मुकाबले भारत में मोटापे की दर कम होने के बावजूद भी भारतियों में डायबिटीज उनके मुकाबले ज्यादा पाया जाता है।

अगर डायबिटीज को कंट्रोल में न रखा जाये तो वो शरीर में और कई गम्भीर बिमारियों का कारन बन सकती है, जिन में सबसे आम बीमारी है ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी‘ जोकि करीब 24.6% डायबिटीज क मरीज़ों में होती है। इस के बाद आती हैं दिल की बीमारियां जोकि 23.6 % मरीज़ों में होती है, फिर गुर्दे की समस्या ( 21.1%), रेटिनोपैथी ( आँखों की समस्या ) 16.6%, और फुट अलसर 5.5% में ।

डायबिटीज क्या है?

भईया आसान भाषा में बोलू तो अगर आप के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा एक तय मानक के ऊपर निरन्तर बनी रहे तो कहा जाता है की आप को डायबिटीज है। जी हाँ ग्लूकोज़ , जिसे आम भाषा, या कह लीजिये कि layman language में बोला जाता है की भइया इनका शुगर बढ़ गया है। ये मानक अलग-अलग टेस्ट के अनुसार अलग-अलग होते हैं , जैसे – fasting blood glucose test में – 125 mg/dL से ऊपर वालों को डायबिटिक बोला जाता है , और oral glucose tolarence test में – 200mg/dL से ऊपर वालों को ।

अब अगर आप ने इससे पहले डायबिटीज पे कोई लेख पढ़ा होगा तो आप के अन्दर का डॉक्टर ये चीख-चीख के बोल रहा होगा की ” इन्सुलिन , इन्सुलिन के बारे में तो बोले ही नहीं , इन्सुलिन भी तो कम होता है, सारे फसाद की जड़ तो वही है “।

तो जी हाँ आप सही कह रहें है, पर सबकुछ इतना आसान नहीं जितना लग रहा है । अब ये इन्सुलिन और ग्लूकोज़ में क्या रिश्ता है और ये रिश्तेदारी कैसे डायबिटीज क लिए जिम्मेदार है ये जानने के लिए पहले आप को जानना होगा कि हमारा शरीर कैसे खाने से ऊर्जा का उत्पादन करता है।

खाने से ऊर्जा का उत्पादन कैसे होता है और इसमें ग्लूकोज़ और इन्सुलिन की क्या भूमिका है , चलिए इन दोनों सवालों क जवाब जानते है हमारे अगले शीर्षक डायबिटीज कैसे होती है ? में –

डायबिटीज कैसे होती है?

डायबिटीज कैसे होती है ये जानने से पहले चलिए ये जानते है कि हमारा शरीर जो हम खाना कहते हैं उससे ऊर्जा कैसे बनता है ।

हमारा शरीर खाने से ऊर्जा कैसे बनाता है ?

हम सभी इस बात को जानते हैं की शरीर को काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है, और ये ऊर्जा हम सब्जी ,दाल, मस्त घी में चुपड़ी रोटी, गरम -गरम पकोड़े व अन्य खाद्य पदार्थो का सेवन कर के लेते है।

शरीर ऊर्जा का उत्पादन कोशिकाओं के स्तर पर करता है , और शरीर की हर एक कोशिका में ये प्रक्रिया होती है। अब जैसे पुराने ज़माने में स्टीम इंजन होते थे न जिनमे कोयले को भट्टी में जलाया जाता था और उससे इंजन को ऊर्जा मिलती थी जिससे वो आगे बढ़ता था। वैसे ही हमारे शरीर के मामले में ये कोयला ग्लूकोज़ होता है जिससे हमारे शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन करती हैं।

हम सब जो घी में चुपड़ी रोटी और गरम-गरम पकोड़े खाते हैं उनमें मौजूद कार्बोहायड्रेट(carbohydrate ) को हमारे पाचन तंत्र द्वारा ग्लूकोज़ में तोड़ दिया जाता है।इस ग्लूकोज़ को हमारी अंत सोख लेती हैं और हमारे खून में पहुंचा देती है। हमारा खून किसी डाकिये की भाँति इस ग्लूकोज़ को शरीर की हर कोशिका तक पहुँचा देता है।

हमारी कोशिकाओं में एक दरवाज़ा होता है जिसके द्वारा ग्लूकोज़ कोशिका में प्रवेश करता है और इस दरवाज़े का नाम है ग्लूकोज़ ट्रांसपोर्टर टाइप-4 (GLUT-4 ) और इस दरवाज़े की चाभी होती है हमारे इन्सुलिन भईया क पास।

जब भी हम खाना खाते हैं तो हमारा पाचन तंत्र उसमे से ग्लूकोज़ निकाल के हमारे खून में डाल देता है जिससे हमारे खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है। जैसे ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है वैसे ही शरीर इन्सुलिन उत्पाद भी बढ़ा देता है और खून में इन्सुलिन भी बढ़ जाता है। अब हमारे ये जो इन्सुलिन भईया हैं वो जाके कोशिका में मौजूद दरवाजे(GLUT-4 ) को खोल देते हैं जिससे ग्लूकोज़ कोशिका में प्रवेश कर लेता है, और कोशिका उससे ऊर्जा बनाती है।

इन्सुलिन कहाँ बनती है?

अब आप बोलेंगे कि चचा इतना ज्ञान दे दिए हो तो ये भी बताओ कि ये इन्सुलिन कहाँ से प्रकट होती है, धरती फड़ के आती है कि आसमान से टपकती है। तो भईया ना ये आसमान से आती है ना पाताल से, ये बनती है पैंक्रियास(pancreas) में। पैंक्रियास हमारे शरीर का एक अंग है, इसको जब हम माइक्रोस्कोप में देखते हैं तो कुछ टापू नुमा संरचनाएं दिखाई देती है जिन्हें Icelets of langerhans कहा जाता है, और इनमे मौजूद होती हैं बीटा कोशिका( beta cell) जो इन्सुलिन को बनाती है।

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अब ये डायबिटीज कैसे होती है?

ऊपर जो रामायण मैंने लिखी है उससे आप समझा ही गए होंगे की शरीर ग्लूकोज़ का इस्तेमाल कैसे करता है। जब हम खाना खाते हैं तो खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है जिसे postprandial glucose level  कहा जाता है, और फिर इन्सुलिन बढ़ता है। इन्सुलिन बढ़ता है तो शरीर ग्लूकोज़ का इस्तेमाल करने लगता है और  खून में उसकी मात्रा काम जाती है। ये तो हैं सामान्य प्रक्रिया , अब अगर इस प्रक्रिया में कोई पंगा हो जाये तो खून में बढ़ जाता है स्तर ‘ग्लूकोज़ का’ और बन  जाते हैं आप शिकार ‘डायबिटीज के’।  

इन्सुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistence)

जैसा की मै आप को बता चूका हूँ की हमारे शरीर में जो कोशिका हैं उनमे  ग्लूकोज़ के लिए एक दरवाज़ा होता है जिसकी चाभी इन्सुलिन  पास होती है। अब अगर उस दरवाज़े में इन्सुलिन की चाभी ही सही से काम न करे तो?अरे भईया तब तो दरवाज़ा सही से खुलेगा ही नहीं। बस इस को हम इन्सुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistence) कह देते हैं। जब दरवाज़ा एक इन्सुलन से नहीं खुलता तो कई सारे इन्सुलिन को आके जोर लगाना पड़ता है और इन्सुलिन की मांग शरीर में बढ़ जाती है। 

और शरीर की भी एक क्षमता है ना इन्सुलिन बनाने की, अब जहाँ तक वो बना पता है बनाता है और जब नहीं बना पाता तो खून में ग्लूकोज़  बढ़ने लगता है और उसे ही हम डायबिटीज कह देते हैं।

इन्सुलिन  के उत्पादन में कमी आना

पिछले शीर्षक में तो दरवज़ा नहीं खुल पा रहा था, इसमें तो दरवाज़ा खोलने वाला ही गायब हो जाता है।किसी भी वजह से इन्सुलिन के उत्पादन में कमी आजाऐ तो खून में ग्लूकोज़ बढ़ने लगेगा और आप डायबिटीज के आगोश में समा जाएगे।

अब इन्सुलिन के उत्पादन में कमी आने के बहुत सरे कारण हो सकते हैं और अगर मै आपको वो बताने लग गया तो ये लेख काफी लम्बा हो जायेगा । अगर फिर भी आप के अंदर का डाक्टरी वाला कीड़ा जगे तो निचे कमेंट कर के बता दीजिएगा, मै उस पर अलग से लेख लिख दूंगा।

मोटापे से डायबिटीज कैसे होता है?

इसको समझने के लिए भी ‘हमारा शरीर खाने से ऊर्जा कैसे बनाता है ?’ वाली कथा का सहारा लेना पड़ेगा।

उससे पहले आप ये जान लीजिये कि मोटे लोगों के खून में triglycerides की मात्रा बढ़ी रहती है।और भईया ज्यादा मात्रा में ये triglyceride बहुतै खतरनाक चीज होती है , इसके बढ़ने से आप को कई तरह की बीमारी हो सकती हैं।

तो ये जो triglyceride है वो जाके कोशिकाओं में ग्लूकोज़ के दरवाज़े जाम कर देते हैं यानी इन्सुलिन रजिस्टेंस(Insulin Resistence) बढ़ा देता है, और इसके साथ में इन्सुलिन के उत्पादन को भी कम कर देता हैं, जिससे खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है। जिसके कारण डायबिटीज आप का नया जीवन साथी बन जाता है।

Triglyceride के स्तर :-

सामान्य triglyceride स्तरLess than 1.7 millimoles per litre (mmol/L)
सामान्य से थोड़ा ज्यादा 1.7 to 2.1 mmol/L
चिंता जनक ( high )2.2 to 5.4 mmol/L
Very high( बहुत ज्यादा )5.5 mmol/L or higher
Source : Triglyceride levels

 प्री-डायबिटीज (prediabetes ) क्या है ?

अगर आप के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा सामान्य से बढ़ जाये पर इतनी भी न बढे की उसे डायबिटीज घोषित किया जा सके तो कहा जाता है की आप को प्री डायबिटीज है। डायबिटीज को जाँचने के लिए कई सरे टेस्ट किये जा सकते हैं, और हर टेस्ट में डायबिटीज और प्री डायबिटीज अलग- अलग मानक हैं। निचे टेबल में मैंने टेस्ट के नाम और उनके मानक लिख दिए हैं आप चाहें तो उनपे अपनी नज़रों के घोड़े दौड़ा सकतें हैं।

DiagnosisA1C (percent) Fasting plasma glucose (FPG)-(mg/dL)Oral glucose tolerance test (OGTT)-(mg/dL)Random plasma glucose test (RPG)-(mg/dL)
Normal( सामान्य)below 5.799 or below139 or below 
Prediabetes(प्री डायबिटीज)5.7 to 6.4100 to 125140 to 199 
Diabetes(डायबिटीज)6.5 or above126 or above200 or above200 or above

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 डायबिटीज के कितने प्रकार होते हैं?

डायबिटीज का वर्गीकरण उसको पैदा करने वाले कारकों के आधार पर किया गया है। डायबिटीज के लगभग 11 प्रकार होते हैं पर ज्यादातर मामले डायबिटीज टाइप-1 और टाइप-2 के अंतर्गत आते हैं। चलिए मैं आप को बाकि बचे 9 प्रकारों के बारे में भी बता देता हूँ वार्ना आप बोलेंगे की लेखक गोली देके आगे बढ़ गया पूरा नहीं बताया।

डायबिटीज के 11 प्रकार :

  1. Type-1
  2. Type-2
  3. Gestational diabetes
  4. Genetic defect in beta cell development and function
  5. Genetic defect in insulin action
  6. Exocrine pancreatic defect
  7. Endocrinopathies
  8. Infections- Cytomegalo virus, coxsackie B virus, congenita rubella
  9. Drugs: Glucocorticoids, thyroid hormone, beta adrenergic agonists
  10. Genetic syndrome associated with diabetes: down syndrome, klinefelter syndrome, Turner syndrome.
  11. Latent autoimmune diabetes in adult

डायबिटीज के इतने सरे वर्गों में से टाइप-1 और टाइप-2 ही हैं जो दुनिया भर क मरीजों को सबसे ज्यादा प्रेम देते है।बाकी सब तो ईद के चाँद की तरह होतें हैं एक्का-दुक्का कभी- कभी मिलते है, तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता है ना कि हम टाइप-1 और 2 के बारे में और अच्छे से जाने। तो चलिए टाइप-1 और टाइप-2 को थोड़ा और गहराई से समझते  हैं ।

टाइप-1 डायबिटीज

दुनिया भर के करीब 5-10% डायबिटीज के मरीज़ इस वर्ग में आते हैं। ये ज्यादातर 20 साल से कम उम्र के बच्चों में पाया जाता है, पर ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।

टाइप-1 डायबिटीज में इन्सुलिन नहीं बन पाती क्यों कि हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र(अरे अंग्रेजों Immune system) pancreas में मौजूद बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। बीटा कोशिकाएं ही इन्सुलिन को बनाती हैं तो उनके नष्ट हो जाने से इन्सुलिन नही बन पाती और खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है।

अब आप का शरीर इन्सुलिन नहीं बना पा रहा है तो आप को वो बाहर से ही लेना पड़ेगा ना, क्योंकि बिना इन्सुलिन के तो काम नही चलने वाला। इसीलिए टाइप-1 के मरीजों को जिंदा रहने के लिए रोज़ इन्सुलिन के इंजेक्शन ठोंकने पड़ते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज

करीब 90-95% डायबिटीज के मामले इस वर्ग में आते हैं, और इनमें भी ज्यादातर लोग वो होतें हैं जिन्हें मोटापे ने जकड़ा होता है। वैसे तो मैं ये पहले बात चुका हूँ पर फिर सुनलीजिये, मोटापे से ग्रस्त लोगों के खून में triglyceride की मात्रा बढ़ जाती है। Triglyceride एक तरह का fat (चर्बी) ही होता है पर शरीर मे इसकी मात्रा ज्यादा होने से शरीर के इन्सुलिन रजिस्टेंस पैदा होने लगती है और pancreas में बीटा कोशिका की इन्सुलिन बनाने की क्षमता भी कम हो जाती है।

इसमे राहत की बात यही है कि शरीर में इन्सुलिन कम ही सही पर बनता रहता है, तो आप को रोज़ इन्सुलिन के इंजेक्शन ठोंकने की जरूरत नहीं पड़ती। आप अपने खान-पान पर नियंत्रण कर के और व्यायाम कर के अपने खून में ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित रख सकते हैं।

जाने कौन से 11 योगासन करके आप डायबिटीज पर नियंत्रण कर सकते हैं – 11 योग मधुमेह को हराने के लिए

जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes)

जेस्टेशनल डायबिटीज महिलाओं में होता है जब वो गर्भवती होतीं है। ज्यादातर मामलों में प्रसव क बाद ये अपने आप चला जाता है पर अगर किसी महिला को जेस्टेशनल डायबिटीज हुई हो तो उसमे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज में माँ के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं जो बच्चे के लिए काफी परेशानियां पैदा कर सकतीं हैं जैसे-

  1. बच्चे का समय से जल्दी पैदा होना या मारा हुआ बच्चा पैदा होना।
  2. बच्चे का वजन असामान्य रूप से ज्यादा होना, जिससे प्रसव के वख्त दिक्कत आती है और बच्चे को चोट लग सकती है।
  3. साँस लेने में तकलीफ होना ।
  4. प्रसव के तुरंत बाद ग्लूकोज़ लेवल बहुत काम हो जाना- hypoglycemia.
  5. बच्चे में भी डायबिटीज होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

डायबिटीज के मरीज़ों में क्या स्वस्थ्य सम्बन्धी समस्याए पैदा हो सकती हैं?

जब खून में ग्लूकोज़ की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो जाती है तो इसे hyperglycemia कहा जाता है। डायबिटीज के मरीज़ों में भी ये hyperglycemia होती है इतना तो आप जानते ही हैं।अबे ये hyperglycemia की परिस्तिथि बहुत ख़राब होती है, और ये अपना असर तुरंत नहीं दिखाती बल्की कुछ सालों बाद दिखाती है। डायबिटीज के मरीज़ों में hyperglycemia की वजह से काफी गंभीर समस्याऐं पैदा हो जाती हैं जैसे:

  • दिल की समस्याएं
  • स्ट्रोक
  • गुर्दे की बीमारियाँ
  • आँखों की समस्याएँ – Diabetic retinopathy
  • शरीर के निचले भाग में gangrene
  • डायबिटिक नेफ्रोपैथी (Diabetic nephropathy )
  • Neuropathy

आम तौर पर ये समस्याएं hyperglycemia के शुरू होने के 15-20 साल बाद पैदा होती है। इससे बचने का बस एक ही तरीका है ,अपने खून में गग्लूकोज़ की मात्रा पर नियंत्रण रखना, आम भाषा में बोलूं तो शुगर को कन्ट्रोल करना। और हाँ अगर सुट्टा (सिगरेट ) फूकते हो तो वो भी बंद कर दो क्योंकि वो भी इन समस्यों के पैदा होने का एक महत्वपूर्ण कारण हैं।

डायबिटिक न्यूरोपैथी

डायबिटिक नुरोपैथी का मतलब होता है शरीर की नसों का क्षतिग्रस्त हो जाना। डायबिटीज में हमारे ग्लूकोज़ और triglycerides बढ़ जाते हैं जो धीरे-धीरे हमारी शरीर की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं।

डायबिटिक न्यूरोपैथी के प्रकार –

  1. Peripheral neuropathy
  2. Autonomic Neuropathy
  3. Focal Neuropathies
  4. Proximal Neuropathy

डायबिटीज के मरीज़ों में आँखों की समस्याएँ

लम्बे समय तक आपके शरीर में hyperglycemia होने से आपकी आँखों पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे कई तरह की आँखों की समस्याएं पैदा हो जाती हैं जैसे –

  1. डायबिटिक रेटिनोपैथी
  2. डायबिटिक मैक्युलर इडिमा
  3. cataracts
  4. ग्लूकोमा

डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy )

आप की आखों में एक रेटिना(Retina ) नामक संरचना होती है जो आप की आखों में आने वाली रौशनी को पकड़ती हैं और उसे एक तरह के संकेत में बदल कर दिमाग को नसों द्वारा भेजती हैं । अब दिमाग इस भेजे हुए संकेत को पढता है और आप को एक तस्वीर दिखाई देती है।

अब अगर रेटिना में रक्त पहुँचाने वाली रक्त वाहिकाओं में कोई नुकसान हो जाये तो इससे रेटिना को और हमारी दृष्टि को भी नुक्सान पहुँचता हैं, और इसे ही डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं।

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source : Diabetic Eye Disease-NIH

किन में टाइप-२ ( type -2 ) डायबिटीज होने की ज्यादा संभावना होती है?

अगर आप की उम्र 45 से ज्यादा है , आप के परिवार में(मतलब जेनेटिक रिलेशन वाले ) किसी को डायबिटीज है, आप मोटापे के शिकार हों , और अगर आप शारीरिक गतिविधियां नहीं करते हों और सुस्त मरियल से घर में बैठ के टीवी देखना पसंद करतें हों तो सावधान हो जाइए, आप में डायबिटीज होने की सम्भावना औरों से ज्यादा है।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure ),HDL (जिसे गुड कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है ) की खून में कम मात्रा, triglyceride की ज्यादा मात्रा, डिप्रेशन भी आप में डायबिटीज होने की सम्भावना को बढ़ाता है।

African American, Alaska Native, American Indian, Asian American, Hispanic/Latino, Native Hawaiian, और Pacific Islander में डायबिटीज होने की सम्भावना ज्यादा होती।

अब भैया आप अपनी जेनेटिक्स , परिवार, जातीयता(ethnicity ) और अपनी उम्र को तो बदल नहीं सकते , तो अब अपनी आदतों को ही बदलना पड़ेगा। अपने आलसी शरीर को उठाइये और सुबह शाम दौड़ लगाइए , अच्छा स्वस्थ भोजन कीजिये, व्यायाम कीजिये। जिन लोगों में ये जोखिम करक नहीं हैं वो ज्यादा खुश न हों, सम्भावना कम है मतलब ये नहीं की होगा ही नहीं। आप भी अगर आलसियों की तरह पड़े रहेंगे और उल्टा सीधा खाये पियेंगे तो टाइप -2 डायबिटीज आप से भी मुहोब्बत कर बैठेगा, और ये टाइप-२ डायबिटीज आजकल की लड़कियों की तरह नहीं हैं जो आज हैं और कल का पता नहीं। टाइप-2 डायबिटीज तो पूरी शिदत्त से प्रेम करता है , ये एक बार आप का हाँथ थाम ले तो फिर आखिरी साँस तक साथ निभाता है, और हो सकता है आप की आखिरी साँस का कारण ही यही बनजाये। तो सोच लीजिये कहीं इसकी मुहोब्बत आप को भरी न पड़जाए।

टाइप-२ डायबिटीज से बचाव कैसे करें?

अब अगर आप का वजन सामान्य से ज्यादा है, या आप के माता-पिता, भाई-बहन को टाइप-२ डायबिटीज हो ,या आप कोई महिला हैं जिस को गर्भावस्ता के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज हुई थी तो आप में टाइप- २ डायबिटीज होने की काफी ज्यादा सम्भावना है। वैसे तो मैं ऊपर बता ही चूका हूँ की आप अपनी दिनचर्या में बदलाव लेक और खान पान को ठीक कर क इससे बचाव कर सकते हैं पर चलिए इसके बारे में थोड़ा और जान लेते हैं ।

निचे कुछ उपाए हैं जिनको अपना के आप डायबिटीज से बचाव कर सकतें हैं और अपने जीवन में हर्ष ओ उल्लास की लेहेर ला सकते हैं ।

  1. वजन ज्यादा है तो काम करें : आप अपने वजन में 5 से 7% तक कमी लाए, इससे आप डायबिटीज की संभावना को काफी हद तक काम कर सकते हैं।
  2. अपने शरीर का ज्यादा इस्तेमाल करें: हर दिन कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करें, और जो अपनी बिल्डिंग में लिफ्ट का इस्तेमाल करतें हैंना वो भी कम कर दें। जितना हो सके शरीर को काम में लाएं।
  3. अच्छा सवस्थ खाना खाएं: पेप्सी , कोकाकोला और बाकि कोल्ड्रिंक का सेवन काम करें और उसकी जगह जितना हो सके उतना पानी का सेवन करें , घी तेल का सेवन भी काम करें और फल , हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं।

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डायबिटीज की जाँच किसको करानी चाहिए?

 वो सभी लोग जिनमे डायबिटीज के लक्षण हों या उनमे डायबिटीज होने का जोखिम ज्यादा हो(जैसे – अलसी और गोल-मटोल मोटापे के शिकार लोग), उनको डायबिटीज की जाँच निरंतर कराते रहना चाहिए। इससे वे अपने स्वस्थ पर  नज़र रख सकते हैं और डॉक्टर उनमे प्री डायबिटीज को जल्दी पहचान कर उसे डायबिटीज में बदलने से रोक सकते हैं। 

डायबिटीज़ में कौन से टेस्ट कराए जाते है?

डायबिटीज को पहचान  के लिए कई तरह के टेस्ट कराए जाते हैं, जैसे-

  1. Fasting plasma glucose (FPG) test
  2. A1C test
  3. Random plasma glucose (RPG) test
  4. Glucose challenge test
  5. Oral glucose tolerance test (OGTT)

डॉक्टर ज्यादा तर Fasting plasma glucose (FPG) test और A1C test का इस्तेमाल करते हैं डायबिटीज को पहचानने के लिए।

Fasting plasma glucose (FPG) test

इस टेस्ट को कराने के लिए आप को कम से कम 8 घंटो तक भूखा रहना पड़ता है, इसी लिए ये टेस्ट आम तौर पर सुबह के समय कराया जाता है। और 8 घंटे भूखा मतलब कुछ भी नहीं खाना है, बस पानी पी सकतें हैं।

A1C test

ये टेस्ट आपके खून में पिछले 3 महीनों की ग्लूकोज़ की मात्राओं का औसत बताता हैं। A1C टेस्ट को और भी कई नामों से जाना जाता हैं , जैसे-

  1. hemoglobin A1C
  2. HbA1C
  3. Glycated hemoglobin
  4. glycosylated hemoglobin test

और इस टेस्ट की एक अच्छी बात ये है कि आप इस टेस्ट के लिए आप को भूखा रहने की कोई आवश्यकता नहीं होती, आप इस टेस्ट से पहले आराम से खा-पी सकते हैं।

निचे टेबल में मैंने इस टेस्ट परिणाम सामान्य अवस्था और डायबिटीज में कितना आना चाहिए वो लिखा है-

अवस्थाA1C (percent) मात्रा(% में)
Normal( सामान्य)below 5.7
Prediabetes(प्री डायबिटीज)5.7 to 6.4
Diabetes(डायबिटीज)6.5 or above

Random plasma glucose (RPG) test

इस टेस्ट में भी भूखे रहने की कोई आवश्यकता नहीं होती।अगर डॉक्टर को लगता है की आप में डायबिटीज के लक्षण हैं और वो आप के 8 घंटे भूखे रहने का इंतज़ार नहीं करना चाहता ताकी आप के इलाज में देरी न हो , तब वो इस टेस्ट को करवाने के लिए बोल सकता है।

Oral glucose tolerance test (OGTT)

इस टेस्ट में आप को भूखा रहना पड़ता है। डॉक्टर आप को 8 घंटे तक भूखा रहने को बोलेगा और उसके बाद आप के खून का एक नमूना लेगा , फिर आप को 75 g anhydrous glucose को 250-300 ml पानी में मिलाके देगा और 2-3 घंटे तक हर घंटे आप के खून का नमूना लेगा ।

अवस्था Oral glucose tolerance test (OGTT)-(mg/dL)
Normal( सामान्य)139 or below
Prediabetes(प्री डायबिटीज)140 to 199
Diabetes(डायबिटीज)200 or above

डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं कि आप  किस प्रकार की डायबिटीज है.

ऊपर मैंने आप को जितने भी टेस्ट बताए हैं वो ये तो बता सकतें हैं की आप को डायबिटीज है या नहीं , पर ये कोई भी नहीं बता सकता की कौन से प्रकार की डायबिटीज है। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों डायबिटीज के लक्षण एक ही प्रकार के होतें है तो ये बताना मुश्किल हो जाता है कि इसमें से कोन सी वाली आपको हैं, पर ये जानना भी जरूरी है क्यूंकि डायबिटीज का इलाज उसके प्रकार पर भी निर्भर करता है। 

इसकी पहचान के लिए डॉक्टर आपके खून में Autoantibody की  जाँच करते हैं । दरसल autoantibody की वजह से ही टाइप-1 डायबिटीज होती है। अब अगर आप को गहराई से जानना है की ये कैसे होता है तो कमेंट करके मुझे जरूर बताएं।

तो अगर खून में autoantibodies मिलती हैं तो डायबिटीज होगी टाइप-1, और नहीं होंगी तो टाइप-2 ।

डायबिटीज के उपचार।

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डायबिटीज का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है, और इन्सुलिन डायबिटीज के इलाज का एक महत्वपूर्ण भाग है। इलाज में आप की दिनचर्या, खान-पान , और  कसरत जैसी चीज़ें भी एक बड़ा रोल अदा करती है।

टाइप-1 डायबिटीज का इलाज।

अगर आप को टाइप-1 डायबिटीज है तो आप को इन्सुलिन लेनी ही पड़ेगी क्योंकि टाइप-1 में आप का शरीर इन्सुलिन बनाना ही बंद कर देता है।आप को दिन में कई  बार इन्सुलिन लेना पड़ता है, और खाने से 1-2 घंटे पहले तो लेना जरूरी हो जाता है क्योंकि खाने के तुरंत बाद खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है ।

इन्सुलिन को लेने के कई तरीके होतें हैं जिनके नाम मैंने नीचे लिखे हैं, अगर आप को इनके बारे में विस्तार से जानना है तो कमेंट करके मुझे बताएं:

  1. Needle और syringe
  2. Insulin pen 
  3. Pump 
  4. Inhaler 
  5. Injection port 
  6. Jet injector 

टाइप-2 डायबिटीज का इलाज।

टाइप-2 डायबिटीज में आप का शरीर इन्सुलिन बनता है, तो आप को बहार से इन्सुलिन लेने की ज़रुरत नहीं होती। टाइप-2 में आप को अपने खान-पान और शारीरिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देना होता है। इसके साथ हो सकता है डॉक्टर आपको metformin भी दे। Metformin आप के लिवर द्वारा बनाए जाने वाले ग्लूकोज़ की मात्रा को कम करता है और आप के शरीर को इन्सुलिन का बेहतर उपयोग करने में मदद करता हैं।

डायबिटीज की दवाओं के side effect क्या होतें हैं?

डायबिटीज की दवाओं का काम आप के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा को कम करना होता है, पर दवा को तो ये नहीं मालूम न की आप के खून में ग्लूकोज की कितनी मात्रा होनी चाहिए। वो तो खून में जाते ही अपना काम शुरू कर देता है, और कुछ परिस्थितियों में ये खून में ग्लूकोज़ की मात्रा को सामान्य से भी कम कर देता है जिसे Hypoglycemia कहा जाता है।

जैसे मान लीजिए की आप ने खाने से पहले इन्सुलिन लिया और किसी वजह से खाना ही नहीं खाया,  तो अब आपके शरीर में खाने के बाद जो ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़नी चाहिए थी वो नहीं बढ़ेगी और ये जो इन्सुलिन आपने लिया है वो आप के खून में ग्लूकोज़ को सामान्य से भी निचे ले जायेगा।

क्या दवाओं के अलावा डायबिटीज का कोई इलाज हैं ?

अगर दवाओं और जीवन शैली परिवर्तन से आप की डायबिटीज नियंत्रण में नहीं आ रही है तो आप निचे लिखे हुए उपचारों में से कोई उपचार अपना सकतें हैं-

  1. Bariatric surgery
  2. Artificial Pancreas
  3. Pancreatic islet transplantation

अगर आप को इसके बारे में और विस्तार से जानना है तो तो कमेंट कर के जरूर बताएँ ।

डायबिटीज में क्या खाए ?

आप निम्नलिखित खाद्य सामग्री सेवन कर सकते हैं-

सब्जियाँ Broccoli , गाजर, हरी सब्जियाँ, टमाटर, मक्का, मटर
फल संतरा,तरबूज, जामुन, सेब, केले, और अंगूर
अनाज
गेहूं, चावल, जई, कॉर्नमील, जौ और क्विनोआ
प्रोटीनमांस,चिकन या टर्की त्वचा के बिनामछलीअंडेनट और मूंगफलीसूखे सेम,  मटर,  छोला मांस के विकल्प, जैसे टोफू
दूध व दूध से बने खाद्य सामग्रीदही, पनीर
Source : Diabetes Diet, Eating, & Physical Activity

डायबिटीज के बारे में और जानें –

Reference

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