diabetes ka management kese karen
Diabetes

Diabetes ka management kese karen

मधुमेह का कोई स्थाई इलाज नहीं है। पर इस का मतलब ये नहीं कि आप एक स्वस्थ जीवन नहीं व्यतीत कर सकते। आप हर दिन अपना ख्याल रख के और इस लेख में दिए निर्देशों का पालन कर के, एक लंबे और स्वस्थ जीवन का अनुभव कर सकतें हैं।

मधुमेह आपके शरीर के लगभग हर हिस्से को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, आपको अपने खून में ग्लूकोज़  के स्तर को प्रबंधित करने की आवश्यकता होगी, जिसे शुगर भी कहा जाता है। आपके शुगर, साथ ही आपके रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन, स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है जो आपको मधुमेह होने पर हो सकते हैं।

आप अपने मधुमेह का प्रबंधन कैसे कर सकते हैं? Diabetes ka management kese karen?

अपने मधुमेह या डायबिटीज,जो भी कह लीजिए, का प्रबंधन करने के लिए आप को एक सेल्फ-केयर प्लान बनाना होगा। आप इस लेख में दी गयी जानकारी और अपने डॉक्टर की मदद से एक सेल्फ केयर प्लान का निर्माण कर सकतें हैं।

मधुमेह का प्रबंधन करने के तरीके।

  1. अपने मधुमेह की ABCs को जाने और उसका प्रबंधन करें।
  2. आप के डॉक्टर द्वारा बताई गई भोजन योजना का पालन करें।
  3. वर्जिश और अन्य शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  4. अपनी दवाओं को निरंतर लेते रहें।
  5. अपने खून में ग्लूकोज़( शुगर) के स्तर को समय-समय पर जाँचते रहें।
  6. अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।

अपने ABCs का प्रबंधन करें।

भइया ये ABC बहुत ही असरदार नुस्खा है। ABC का मतलब है-

 A1C टेस्ट,Blood pressure( रक्तचाप ), और cholestrol। इनकी जानकारी से आप अपने डायबिटीज पर नियंत्रण रख सकतें हैं , और दिल के दौरे, स्ट्रोक, और अन्य डायबिटीज की समस्यों की संभावना को कम कर सकतें हैं।

A- मतलब A1C टेस्ट

A1C परीक्षण पिछले 3 महीनों में आपके खून में ग्लूकोज़ के स्तर की औसत मात्रा को दर्शाता है। मधुमेह वाले कई लोगों के लिए A1C का लक्ष्य 7 प्रतिशत से कम होता है।  अपने डॉक्टर से पूछ कर अपने लक्ष्य स्तर को निश्चित करें और उसको बनाए रखने की कोशिश करें।

B- मतलब Blood pressure( रक्तचाप )

मधुमेह वाले अधिकांश लोगों का रक्तचाप लक्ष्य 140/90 मिमी Hg से कम होता  है। डॉक्टर से पूछें कि आपका लक्ष्य क्या होना चाहिए।

C- मतलब cholestrol

आपके रक्त में दो प्रकार के कोलेस्ट्रॉल हैं: एलडीएल (LDL)और एचडीएल(HDL)। एलडीएल या “खराब” कोलेस्ट्रॉल आपके रक्त वाहिकाओं में रुकावट पैदा कर सकता है। बहुत अधिक मात्रा में LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) दिल का दौरा या स्ट्रोक का कारण बन सकता है। एचडीएल या “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल आपके रक्त वाहिकाओं से “खराब” कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है।

अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके कोलेस्ट्रॉल की मात्रा क्या होनी चाहिए। यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, तो आपको हृदय स्वास्थ्य के लिए एक स्टैटिन दवा लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।

S- मतलब Stop smoking( धूम्रपान बंद करें)

धूम्रपान से बचना मधुमेह वाले लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि धूम्रपान और मधुमेह दोनों ही रक्त वाहिकाओं को सकरा करते हैं। रक्त वाहिका का संकुचन आपके हृदय पर अनावश्यक ज़ोर डाल सकता है। 

यदि आप धूम्रपान छोड़ देते हैं तो आप को कई फायदे हो सकतें हैं जैसे-

  1. आप दिल का दौरा, स्ट्रोक, तंत्रिका रोग, गुर्दे की बीमारी, मधुमेह नेत्र रोग, और भी कई बीमारियों के जोखिम कम हो जाएं गे।
  2. आपके कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप के स्तर में सुधार हो सकता है
  3. आपके रक्त परिसंचरण में सुधार होगा
  4. आपको शारीरिक रूप से सक्रिय होने में ज्यादा आसानी होगी।

यदि आप धूम्रपान करते हैं या अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं, तो उसे जल्द से जल्द बंद करदें। मदद के लिए पूछें ताकि आपको इसे अकेले न करना पड़े। आपने डॉक्टर से इन बारे में बात करे और उनसे सुझाव लें।

अपने A1C, रक्तचाप, और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को अपने लक्ष्यों के करीब रखने और धूम्रपान को रोकने से मधुमेह के दीर्घकालिक हानिकारक प्रभावों को रोकने में मदद मिल सकती है। इन स्वास्थ्य समस्याओं में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग, तंत्रिका क्षति और नेत्र रोग शामिल हैं।

आप अपने ABC का एक डायरी में अभिलेख रखें, आप समय-समय पर इनको मापें और अपनी डायरी में लिखें। और जब भी आप अपने डॉक्टर से मिलने जाएं तो इसे साथ लेके जाएं। डॉक्टर इसकी मदद से आपकी स्तिथि का ठीक से आंकलन कर पायेगा और उसी हिसाब से आपके मधुमेह प्रबंधन नीतियों में सुधार के सुझाव दे सकेगा।

अपने खाने की योजना का सही से पालन करें।

अपने डॉक्टर की मदद से एक बढियाँ सी भोजन योजना बनाएं। भोजन योजना बनाने से और उसका सख्ती से पालन करने से आपको अपने खून में ग्लूकोज़ की मात्रा, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।

फल और सब्जियां, बीन्स, साबुत अनाज, चिकन या टर्की को बिना त्वचा, मछली, मीट, और नॉनफैट या कम फैट वाले दूध और पनीर को अपने खाने की योजना( डाइट प्लान या डाइट चार्ट ) में शामिल करें। 

चीनी-मीठे पेय पदार्थों के बजाय पानी पिएं। ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें जो कैलोरी, saturated fat, ट्रांस फैट, चीनी और नमक में कम हों। 

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वर्जिश और अन्य शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

दिन में कम से कम 30 मिनट तक वर्जिश या योग करें, और अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाएं। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों के इस्तेमाल करें, अगर आप के घर में छोटे बच्चे हैं तो समय निकाल कर उनके साथ फुटबॉल, क्रिकेट, या कोई और खेल खेलें। और वैसे भी आज कल के बच्चे तो बस दिन भर मोबाइल, कम्प्यूटर में घुसे रहते हैं, उनके साथ खेलने से उन्हें बाहर निकलने का मौका मिलेगा और इससे आप दोनों को फायदा होगा।

योगा करें

योग शरीर में चुस्ती और स्फूर्ति लाता है और भारत मे सदियों से इसे शरीर को स्वाथ रखने के लिए उपयोग किया जाता रहा है।एक शोध में शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि टाइप-2 मधुमेह में योगा काफी असरदायक साबित हो सकता है। योग से आप के शरीर में स्फूर्ति आती है और शरीर की चर्बी भी कम होती है। योग आप के शरीर मे ग्लूकोज़ की खपत को बढाता है, और पैंक्रियास में इन्सुलिन का उत्पाद भी बढ़ाता है।

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अपने खून में ग्लूकोज़( शुगर) के स्तर को समय-समय पर जाँचते रहें।

मधुमेह के मरीजों के लिए, प्रत्येक दिन अपने खून में ग्लूकोज़ के स्तर की जाँच करना उनके मधुमेह का प्रबंधन करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यदि आप इंसुलिन लेते हैं तो आपके खून में ग्लूकोज़ के स्तर की निगरानी करना बहुत जरूरी है। ग्लूकोज़ की निगरानी के परिणाम आपको भोजन, शारीरिक गतिविधि और दवाओं के बारे में निर्णय लेने में बहुत मदद करते हैं।

घर पर अपने खून में ग्लूकोज़ के स्तर की जांच करने का सबसे आम तरीका ब्लड ग्लूकोज़ मीटर है। आप अपनी उंगलियों के किनारे को एक लेन्सलेट से चुभाकर खून की एक बूंद प्राप्त करते हैं। फिर आप खून को एक परीक्षण पट्टी पर रखतें हैं। और मीटर आपको यह बता देता है कि इस समय आपके रक्त में ग्लूकोज कितना है।

अपने डॉक्टर से पूछें कि आपको कितनी बार अपने खून में ग्लूकोज़ के स्तर की जांच करनी चाहिए। अपने शुगर(ग्लूकोज़) के स्व-जांच का अभिलेख अपनी डायरी में रखें। और जब आप अपने डॉक्टर से मिलने जाएं तो ये डायरी साथ लेके जाएं।

आप निचे दिए गए PDF को डाउनलोड कर के जान सकते हैं की डायरी में शुगर का अभिलेख(record ) कैसे रखना है –

आप को शरीर में शुगर की मात्रा कितनी रखनी चाहिए।

अपने डॉक्टर से इस बात की सलाह जरूर ले कि आप को अपने खून में ग्लूकोज़ की मात्रा कितनी रखनी चाहिए, ज्यादातर मधुमेह के मरीजों को खून में ग्लूकोज़ की मात्रा को नीचे दी गयी मात्रा के अनुसार रखने की सलाह दी जाती है।

खाने से पहले80 से 130mg/dL
खाने के दो घंटे बाद180 mg/dL से कम

क्या होगा अगर आप के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाये।

डॉक्टर खून में सामान्य से ज्यादा ग्लूकोज़ की मात्रा को hyperglycemia कहते हैं।

अगर आप को hyperglycemia है तो आप को ये लक्षण हो सकतें हैं-

  1. ज्यादा प्यास लगना
  2. थका हुआ या कमजोर महसूस करना
  3. सिर दर्द
  4. अक्सर पेशाब आना
  5. धुंधली दृष्टि

यदि आपके खून में ग्लूकोज़ का स्तर हमेशा बढ़ रहता है और hyperglycemia के लक्षण आते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें । आपको अपने मधुमेह भोजन योजना, शारीरिक गतिविधि योजना या दवाओं में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।

क्या होगा अगर आप के खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत ज्यादा कम जाये।

कभी-कभी खून में ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य से नीचे गिर जाता है , जिसे hypoglycemia कहा जाता है। मधुमेह वाले अधिकांश लोगों के लिए, ग्लूकोज़ की मात्रा का 70 mg/dL से नीचे होना hypoglycemia की श्रेडी में आता है। Hypogycemia जानलेवा होता है और इसका तुरंत इलाज बहुत जरूरी है।

मूत्र में ketone की जाँच कब करें?

यदि आप में diabetic ketoacidosis के लक्षण मौजूद हैं, तो आपका डॉक्टर आपको ketons के लिए अपने मूत्र की जांच कराने को बोल सकता है है। जब ketone का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तब आप मे ये जानलेवा स्तिथि पैदा होती है।

 लक्षणों में शामिल हैं-

  1. साँस लेने में कठिनाई
  2. उलटी अथवा मितली
  3. आपके पेट में दर्द
  4. भ्रम की स्थिति
  5. बहुत थकान या नींद महसूस करना

Ketoacidosis सबसे ज्यादा टाइप 1 मधुमेह के मरीजों में मिलता है।

डायबिटीज के बारे में और जानें –

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